“स्प्राइट नहीं, शिकंजी बनाओ!” — मोहन भागवत का Made in India मंत्र

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

जब अमेरिका ने भारत से आने वाले उत्पादों पर 50% टैरिफ ठोंक दिया, तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीयों को विदेश छोड़, “शिकंजी” अपनाने का मंत्र दे डाला।

RSS के 100 साल पूरे होने पर विज्ञान भवन में उन्होंने दो टूक कहा – “आत्मनिर्भर बनना है तो कोका कोला छोड़ो और नींबू पानी अपनाओ।”

कोका कोला का क्या काम जब नींबू, चीनी और नमक पास में हो?

भागवत बोले – “गर्मी में शिकंजी बनाकर पी सकते हो, तो स्प्राइट और थम्सअप क्यों लाना? स्वदेशी सिर्फ नारा नहीं, व्यवहार है।”

शायद अगली बार जब कोई ‘ड्रिंक’ पूछे, तो जवाब हो — “थोड़ी नमक डाल दीजिए।”

विदेशी सामान? लेन-देन चलेगा, लेकिन ‘दबाव’ नहीं!

भागवत ने साफ़ किया कि आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया से कटा रहना नहीं है, बल्कि “वो लेना जो हमें चाहिए — न कि जो हमें बेचा जा रहा है।”

“अंतरराष्ट्रीय व्यापार हो, पर हमारी शर्तों पर। स्वेच्छा से, न कि दबाव में।”

स्वदेशी का मतलब – घर में जो बनता है, बाहर से मत लाओ

उन्होंने कहा — “अगर अपने देश में बनता है, तो वही लो। बाहर से सिर्फ तब लो जब वाकई ज़रूरत हो — और वो भी सोच-समझकर।”

यानि “Amazon से कम, आंगन से ज़्यादा” वाली सोच अपनाओ।

मोदी जी का लाल किला संदेश और भागवत जी का शिकंजी तर्क – जुड़ गया मेल

गौरतलब है कि स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी भी ‘स्वदेशी अपनाओ’ का संदेश दे चुके हैं। अब भागवत के बयानों ने इस मुहिम को ज़मीन से जोड़ दिया — और ग्लास में शिकंजी डालकर परोस भी दिया।

अब देखना ये है कि जब अगली गर्मी आएगी, “Sprite ₹40” और “शिकंजी ₹10” वाले ठेले पर, देशवासी किसे चुनते हैं —
ब्रांड या ब्रांड न्यू भारत?

आत्मनिर्भरता की असली चुस्की

मोहन भागवत का यह बयान केवल शिकंजी और कोका कोला की तुलना नहीं है, बल्कि एक प्रतीक है — उस आत्मनिर्भर सोच का, जिसमें देश निर्भर नहीं, निर्णायक बनता है

तो अगली बार जब प्यास लगे, तो सोचें —“आयात या आत्म-सम्मान?”

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